रात के तीन बजे माथा गर्म लगे तो पहले पांच मिनट में क्या करना है, पैरासिटामोल की खुराक कौन तय करता है, और कौन-से संकेत देखते ही इंतज़ार नहीं करना।
बच्चा करवट बदलता है, आप माथे पर हाथ रखती हैं और वह तवे जैसा गर्म लगता है। गाल लाल, हथेलियां ठंडी। इस पल पहला काम पड़ोस वाली आंटी को फोन करना नहीं, दराज़ से डिजिटल थर्मामीटर निकालना है — हाथ का अंदाज़ा एक पूरे डिग्री तक गलत हो सकता है।
नापने का तरीका: बगल पोंछकर सुखाएं, नोक बगल के बीचों-बीच रखें और बच्चे का हाथ सीने से चिपकाकर बीप बजने तक, करीब एक मिनट, पकड़े रहें। बगल में 99.5°F (37.5°C) से ऊपर तापमान बुखार माना जाता है; कान या माथे वाले थर्मामीटर पर यह रेखा 100.4°F (38°C) है। पारे वाला कांच का थर्मामीटर बच्चों में इस्तेमाल न करें।
हर रीडिंग समय के साथ मोबाइल में लिखें — "रात 3:10, 101.2°F"। डॉक्टर का पहला सवाल यही होगा कि कितना था और कब से। नंबर से ज़्यादा बर्ताव बताता है: 102°F पर खेलता बच्चा उस 100.4°F वाले से कम चिंता की बात है जो सुस्त पड़ा है, दूध छोड़ चुका है और जगाने पर आंख नहीं खोलता।
सूती का एक ही हल्का कपड़ा पहनाएं, पंखा धीमा चलने दें और खिड़की बंद करके कमरे को भट्टी न बनाएं। गुनगुने पानी में कपड़ा भिगोकर माथे, गर्दन, बगल और जांघ की तह पर 5–10 मिनट पट्टी रखें। बर्फ का पानी, फ्रिज का पानी या अल्कोहल कभी न मलें — इससे कंपकंपी आती है और अंदर का तापमान और चढ़ जाता है।
बुखार में शरीर से पानी तेज़ी से उड़ता है। 6 महीने से छोटे शिशु को सिर्फ मां का दूध, पर हर 1.5–2 घंटे में। बड़े बच्चों के लिए एक ORS पैकेट पूरे एक लीटर उबालकर ठंडे किए पानी में घोलें (आधा पैकेट आधा गिलास में नहीं) और हर 15–20 मिनट में दो-तीन घूंट दें। साथ में दाल का पानी, चावल का मांड, नारियल पानी। घोला ORS 24 घंटे में खत्म करें।
भूख का घट जाना सामान्य है — ज़बरदस्ती थाली खाली कराने की ज़रूरत नहीं, पर तरल कभी बंद न हो। मूंग दाल की हल्की खिचड़ी, दही-चावल, केला, उबला आलू काफी हैं। पेशाब पर नज़र रखें: दिन में 6 बार से कम पेशाब मतलब पानी कम जा रहा है। बुखार उतरने के बाद भी 24 घंटे स्कूल या आंगनवाड़ी न भेजें।
पैरासिटामोल बुखार को ठीक नहीं करती, बच्चे को आराम देती है ताकि वह पी सके और सो सके। खुराक हमेशा वज़न के हिसाब से निकलती है, उम्र के हिसाब से नहीं। सबसे बड़ी घरेलू गलती यह है कि सिरप दो ताकतों में आता है — 125 mg/5 ml और 250 mg/5 ml। दोनों में "5 ml" डालने का मतलब दोगुनी दवा है। पर्ची पर ब्रांड, ताकत और ml में खुराक लिखवाकर दवा के डिब्बे के साथ रखें।
दो खुराकों के बीच कम से कम 4 से 6 घंटे का अंतर रखें और 24 घंटे में 4 खुराक से ज़्यादा न दें, जब तक डॉक्टर ने अलग निर्देश न दिया हो। दवा बोतल के साथ आए मापक कप या सिरिंज से ही दें — रसोई का चम्मच 3 ml से 7 ml तक कुछ भी हो सकता है। दो घंटे में बुखार वापस चढ़े तो खुराक दोहराएं नहीं, डॉक्टर को फोन करें। इबुप्रोफेन तभी, जब डॉक्टर कहे।
एस्पिरिन बच्चों को कभी नहीं दी जाती — इससे रेय सिंड्रोम का खतरा है। अपने मन से एंटीबायोटिक भी शुरू न करें: बच्चों के ज़्यादातर बुखार वायरल होते हैं और 3–5 दिन में अपने-आप उतर जाते हैं, जहां एंटीबायोटिक का कोई काम नहीं। पिछली बार की बची पर्ची या पड़ोस के बच्चे की दवा दोहराना सबसे आम और सबसे टालने लायक जोखिम है।
सर्दी-ज़ुकाम, गले का संक्रमण, कान का दर्द और दस्त — सबसे आम वजहें यही वायरल संक्रमण हैं, जिनमें तीसरे-चौथे दिन से ढलान शुरू हो जाती है। बरसात और उसके बाद के महीनों में डेंगू, मलेरिया और टाइफाइड की गिनती बढ़ती है। तेज़ बुखार के साथ बदन दर्द, आंखों के पीछे दर्द, या 3 दिन से ज़्यादा टिका बुखार हो तो खून की जांच टालें नहीं; डेंगू में तीसरे से छठे दिन का समय सबसे ध्यान से देखने वाला होता है।
टीके के बाद का बुखार अलग बात है। 6 हफ्ते, 10 हफ्ते और 14 हफ्ते वाले टीकों के बाद 24–48 घंटे तक हल्का बुखार और इंजेक्शन वाली जगह पर सूजन आम है। IAP टीकाकरण कार्ड पर तारीख और खुराक नोट कर लें। यह बुखार अगली डोज़ छोड़ने की वजह नहीं है; तीन दिन से ज़्यादा टिके या 102°F से ऊपर जाए तो ज़रूर दिखाएं।
"बुखार है मतलब दांत आ रहे हैं" सबसे आम गलत हिसाब है। दांत निकलते समय मसूड़े में खुजली, लार और चिड़चिड़ापन हो सकता है, पर 100.4°F से ऊपर का बुखार दांत से नहीं होता। एक और चुपचाप छूट जाने वाली वजह है पेशाब की नली का संक्रमण — बिना सर्दी-खांसी वाला तीन दिन का बुखार, पेशाब में तेज़ बदबू या पेशाब करते समय रोना हो तो यूरिन टेस्ट के बारे में पूछें।
3 महीने से छोटे शिशु का कोई भी बुखार (बगल में 99.5°F या ऊपर) उसी दिन डॉक्टर को दिखाने की बात है — "सुबह देखते हैं" यहां लागू नहीं होता। किसी भी उम्र में ये संकेत दिखें तो तुरंत अस्पताल: झटके या दौरा, बेहोशी जैसी सुस्ती, जगाने पर ठीक से न जागना, गर्दन में अकड़न, सांस तेज़ चलना या पसलियां अंदर धंसना, होंठ-जीभ या नाखून नीले पड़ना।
इन पर भी देर न करें: ऐसे लाल-बैंगनी चकत्ते जो दबाने पर सफेद न हों, 8–12 घंटे से पेशाब न आना, रोने पर आंसू न निकलना, आंखें और तालू धंसे लगना, लगातार उल्टी जिससे कुछ पेट में रुके ही नहीं, तेज़ पेट दर्द, 3 दिन से लगातार बुखार, या बुखार जो एक दिन उतरकर दोबारा चढ़ जाए। नवजात में बुखार के साथ दूध छोड़ देना अपने-आप में इमरजेंसी है।
बुखार में झटके आ जाएं (आमतौर पर 6 महीने से 5 साल के बीच) तो बच्चे को करवट पर लिटाएं, मुंह में चम्मच, उंगली, चाबी या पानी कुछ न डालें, कपड़े ढीले करें और घड़ी देखकर समय गिनें। ज़्यादातर झटके 2–3 मिनट में रुक जाते हैं। 5 मिनट से ज़्यादा चलें, बार-बार आएं या रुकने के बाद बच्चा होश में न आए तो 108 पर एम्बुलेंस बुलाएं और दवा की बोतल साथ ले जाएं।
"कंबल में लपेट दो, पसीना निकलेगा तो बुखार उतर जाएगा" — सबसे पुरानी और सबसे उलटी असर वाली सलाह। मोटी रज़ाई शरीर की गर्मी बाहर नहीं निकलने देती, तापमान और चढ़ता है और छोटे बच्चों में झटके का जोखिम बढ़ता है। सही तरीका उलटा है: एक सूती परत, हवादार कमरा, धीमा पंखा। "बुखार में नहलाना नहीं" भी पूरा सच नहीं — गुनगुने पानी से स्पंज बिल्कुल ठीक है।
"बुखार में दूध मत दो, कफ बनेगा" और "पानी कम पिलाओ" — दोनों उलटा नुकसान करते हैं, क्योंकि बुखार में सबसे पहले पानी की कमी होती है और मां का दूध उस समय पानी और सुरक्षा दोनों देता है। एक साल से छोटे बच्चे को शहद, घुट्टी या काढ़े की चम्मच न दें — शहद से बोटुलिज़्म का खतरा है और बाज़ार की घुट्टियों में मात्रा का कोई हिसाब नहीं होता।
दादी-नानी की कई बातें बिल्कुल सही भी हैं — बीमारी में गोद, आराम, हल्का खाना, दाल का पानी, ज़्यादा तरल और स्कूल से छुट्टी। इनसे लड़ने की ज़रूरत नहीं। बस दो चीज़ें घर में तय कर लें: तापमान थर्मामीटर से नापा जाएगा, और दवा डॉक्टर की लिखी खुराक से दी जाएगी।
सवाल: दवा कितने डिग्री पर देनी चाहिए? — आम तौर पर तब, जब बगल का तापमान 100.4°F से ऊपर हो और बच्चा बेचैन हो, रो रहा हो या सो न पा रहा हो। 99.8°F पर खेलता-कूदता बच्चा सिर्फ तरल और आराम से संभल जाता है। 3 महीने से छोटे शिशु को कोई भी दवा डॉक्टर से पूछे बिना न दें।
सवाल: गुनगुने पानी से नहलाना ठीक है? — हां। पानी हाथ को गुनगुना लगे, 5–10 मिनट से ज़्यादा नहीं, और तुरंत सुखाकर हल्का सूती कपड़ा पहनाएं। बच्चा कांपने लगे तो रोक दें, क्योंकि कंपकंपी तापमान बढ़ाती है। बर्फ और अल्कोहल किसी भी हाल में नहीं।
सवाल: स्कूल या आंगनवाड़ी कब भेजें? — जब बिना दवा के पूरे 24 घंटे बुखार न आए और बच्चा सामान्य ढंग से खा-पी रहा हो। सिरप की मदद से उतरा तापमान "बुखार खत्म" नहीं होता, और उस हाल में बच्चा दूसरे बच्चों तक संक्रमण भी पहुंचाता है।
सवाल: घर में कौन-सा थर्मामीटर रखें? — 200–400 रुपये वाला साधारण डिजिटल थर्मामीटर काफी है। एक छोटा डिब्बा बनाकर उसमें थर्मामीटर, ORS के दो पैकेट, मापक सिरिंज और डॉक्टर की लिखी खुराक वाला पर्चा एक साथ रखें — रात तीन बजे यही डिब्बा सबसे काम आता है। यह जानकारी जागरूकता के लिए है; जांच और खुराक का फैसला अपने बाल रोग विशेषज्ञ से ही कराएं।