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बच्चा कब चलना और बोलना शुरू करता है? उम्र के हिसाब से माइलस्टोन चार्ट

शिशु विकास · theAsianparent

पहला कदम 9 से 18 महीने के बीच कहीं भी आ सकता है और दो साल पर लगभग 50 शब्द उम्मीद के दायरे में हैं — हर उम्र-बैंड की सामान्य सीमा, घर पर मदद के तरीके और डॉक्टर से मिलने के संकेत।

पड़ोस वाला बच्चा दस महीने में चल पड़ा, और आपका अभी बैठा है

पार्क में शाम को वही बात दोहराई जाती है — "अरे, अभी तक चला नहीं? हमारा तो दस महीने में दौड़ने लगा था।" घर आकर आप फोन में वीडियो देखती हैं, कैलेंडर गिनती हैं और रात को नींद नहीं आती। यह तुलना लगभग हर घर में होती है, और लगभग हर बार बेवजह होती है। विकास एक तारीख नहीं, एक चौड़ी पट्टी है।

एक ही घर के दो भाई-बहन अलग-अलग समय पर चलते हैं। पहला कदम 9 महीने पर आ सकता है और 17 महीने पर भी, दोनों उम्मीद के दायरे में हैं। इसी तरह कुछ बच्चे घुटनों के बल कभी चलते ही नहीं — सीधे पकड़कर खड़े होते हैं और चल पड़ते हैं। तरीका नहीं, आगे बढ़ती हुई प्रगति मायने रखती है।

फिर भी कुछ रेखाएं ऐसी हैं जिनके बाद इंतज़ार की जगह सलाह लेने का समय आ जाता है — 10 महीने पर बिना सहारे न बैठना, 18 महीने पर एक भी कदम न चलना, या 18 महीने पर एक भी सार्थक शब्द न बोलना। आगे दोनों चीज़ें साफ-साफ मिलेंगी: कब चिंता की बात नहीं है, और कब है।

चलने की यात्रा: पलटने से पहले कदम तक

मोटा नक्शा इस तरह है: 3–4 महीने में पेट के बल सिर उठाना, 4–6 महीने में पलटना, 6–9 महीने में बिना सहारे बैठना, 7–10 महीने में घुटनों से घिसटना, 8–11 महीने में पकड़कर खुद खड़ा होना और फर्नीचर के सहारे बगल में चलना, और 9 से 18 महीने के बीच कहीं भी पहला स्वतंत्र कदम। लगभग आधे बच्चे 12 महीने के आसपास चलते हैं, बाकी उससे पहले या बाद में।

चलने से पहले जो सबसे ज़्यादा मदद करता है वह है फर्श पर बिताया समय। जो बच्चा दिन का बड़ा हिस्सा गोद, प्रैम या कुर्सी में रहता है, उसे पीठ और कूल्हे की मांसपेशियां बनाने का मौका ही नहीं मिलता। रोज़ाना, जागते समय, साफ चादर बिछाकर 2–3 घंटे फर्श पर खेलने दें — इसी समय में पलटना, बैठना और घिसटना अभ्यास बनता है।

पहला कदम आने के बाद भी कई हफ्ते डगमगाहट रहती है; बार-बार बैठ जाना और गिरना सामान्य है। घर के नुकीले कोनों पर कवर लगाएं और सीढ़ियों पर गेट लगाएं। जूते की जल्दी न करें — घर के अंदर नंगे पैर या ऐंटी-स्किड मोज़े में चलने से पंजे की पकड़ और संतुलन बेहतर बनता है। 18 महीने पर भी एक कदम न चला हो, या चलने के बाद सिर्फ पंजों पर चलता रहे, तो जांच करवा लें।

बोलने की यात्रा: गुटरगूं से दो शब्दों के वाक्य तक

भाषा का नक्शा भी उतना साफ है: 2–4 महीने में गुटरगूं और "आ-ऊ" जैसी आवाज़ें, 6–9 महीने में "बा-बा, दा-दा, मा-मा" जैसी बड़बड़ाहट, 10–14 महीने में मतलब के साथ पहला शब्द, 18 महीने तक लगभग 10 से 20 शब्द, और 24 महीने तक करीब 50 शब्द और दो शब्दों के जोड़ जैसे "मम्मा पानी" या "पापा गोदी"। दो साल पर बच्चे की बात का लगभग आधा हिस्सा घर के बाहर के लोग भी समझ पाने चाहिए।

समझना हमेशा बोलने से आगे चलता है, और यही सबसे भरोसेमंद संकेत है। एक साल का बच्चा "बाय-बाय करो" सुनकर हाथ हिलाए, अपना नाम सुनकर मुड़े, "जूते कहां हैं" पर जूतों की तरफ देखे — तो भाषा अंदर बन रही है। इसके उलट, जो बच्चा नाम पुकारने पर बार-बार प्रतिक्रिया न दे, इशारा न करे और आंख न मिलाए, उसके लिए सिर्फ शब्दों का इंतज़ार करना ठीक नहीं।

दो-तीन भाषाओं वाले घरों में — जहां दादी भोजपुरी में, मम्मी हिंदी में और स्कूल अंग्रेज़ी में बात करता है — बच्चे कभी-कभी थोड़ा देर से शुरू करते हैं, पर सारी भाषाएं जोड़कर उनके शब्दों की गिनती सामान्य होती है। यह देरी कोई विकार नहीं और इस डर से घर की भाषा छोड़ने की ज़रूरत नहीं। कान का संक्रमण या सुनने में कमी ज़रूर देर की असली वजह हो सकती है — बार-बार कान बहना हो तो जांच करवाएं।

घर पर विकास को सहारा कैसे दें

चलने के लिए महंगे खिलौनों की नहीं, जगह और मौके की ज़रूरत है। बच्चे को सोफे या दीवार के सहारे खड़े होने दें, उसका पसंदीदा खिलौना थोड़ी दूरी पर रखें ताकि पहुंचने की कोशिश बने, और उंगली पकड़कर चलने का अभ्यास दिन में दो-तीन बार कराएं। धक्का देकर चलाने वाली पुश-टॉय गाड़ी संतुलन में मदद करती है — बस वह भारी और चौड़े पहियों वाली हो।

वॉकर से बचें। यह चलना सिखाता नहीं, बल्कि बच्चे को खड़े होने और संतुलन बनाने का अभ्यास करने से रोकता है, और भारत के ज़्यादातर घरों में सीढ़ी या ऊंची दहलीज़ के पास इससे गिरने की घटनाएं आम हैं। बाल रोग विशेषज्ञ लंबे समय से इसकी जगह प्ले-पेन या खुले, सुरक्षित फर्श की सलाह देते हैं। जबरन खड़ा करके अभ्यास कराना भी ज़रूरी नहीं — शरीर अपनी तैयारी खुद तय करता है।

बोलने के लिए सबसे असरदार तरीका सबसे सादा है: दिन भर बच्चे से बात करते रहिए। नहलाते समय "अब पानी डाल रहे हैं", खाना बनाते समय "यह गाजर है, लाल है" — इसी दौड़ती बातचीत से शब्द बनते हैं। उसकी आवाज़ों का जवाब दीजिए, दो सेकंड रुककर उसे बोलने का मौका दीजिए, रोज़ 10 मिनट चित्रों वाली किताब दिखाइए। दो साल से छोटे बच्चे को स्क्रीन से भाषा नहीं आती — वह आमने-सामने की बातचीत से आती है।

उम्र-बैंड चार्ट और हर बैंड का लाल झंडा

6–9 महीने: सहारे से बैठना, दोनों हाथों से चीज़ पकड़ना, बड़बड़ाहट शुरू, अपना नाम सुनकर मुड़ना। लाल झंडा — 9 महीने पर सिर स्थिर न रखना, कोई आवाज़ न निकालना, आंखों से चीज़ को न देखना। 9–12 महीने: बिना सहारे बैठना, घिसटना, पकड़कर खड़ा होना, "मा-मा/दा-दा" कहना, इशारा करना, ताली और बाय-बाय। लाल झंडा — 10 महीने पर बिना सहारे न बैठना, 12 महीने पर न इशारा करना, न ताली, न बाय-बाय।

12–18 महीने: पहला स्वतंत्र कदम, सहारे से खड़े होकर बैठ जाना, 3–20 शब्द, चम्मच पकड़ने की कोशिश, सरल निर्देश समझना। लाल झंडा — 18 महीने पर एक भी कदम न चलना, एक भी सार्थक शब्द न बोलना, सिर्फ पंजों पर चलना। 18–24 महीने: दौड़ना, सहारे से सीढ़ी चढ़ना, 24 महीने तक लगभग 50 शब्द और दो शब्दों के जोड़, गिलास से पीना। लाल झंडा — 24 महीने पर दो शब्द जोड़कर न बोलना, नाम पुकारने पर लगातार जवाब न देना, या पहले सीखा कौशल खो देना।

किसी भी उम्र में ये संकेत तुरंत डॉक्टर को दिखाने वाले हैं: शरीर का एक हिस्सा दूसरे से साफ तौर पर कमज़ोर या ढीला होना, हाथ-पैर का बहुत कड़ा या बहुत लचीला लगना, आंखों का किसी चीज़ पर न टिकना, तेज़ आवाज़ पर चौंकना बंद हो जाना, और सबसे अहम — पहले आ चुका कोई कौशल खो जाना। हर टीकाकरण विज़िट माइलस्टोन पूछने का सही मौका है; IAP कार्ड के साथ अपने सवाल लिखकर ले जाएं। समय से पहले जन्मे बच्चों में गिनती करेक्टेड ऐज से होती है।

दादी-नानी कहती हैं vs डॉक्टर कहते हैं

"वॉकर में डाल दो, जल्दी चलने लगेगा" — यह सबसे लोकप्रिय और सबसे उलटी सलाह है। वॉकर में बच्चा पंजों के बल आगे धकेलता है, जो चलने की असली मांसपेशियां नहीं बनाता, और गिरने-चोट लगने का खतरा जोड़ देता है; कई देशों में यह बिकता ही नहीं। "पैरों की मालिश करके सीधा करो, टांगें टेढ़ी हैं" — छोटे बच्चों में टांगों का हल्का मोड़ सामान्य है और अपने-आप ठीक होता है।

"जो देर से बोलता है वह ज़्यादा तेज़ निकलता है" और "बहुत बच्चे तीन साल पर बोले हैं, इंतज़ार करो" — ये किस्से कुछ बच्चों में सच निकल जाते हैं, पर इनके भरोसे इंतज़ार करना महंगा पड़ सकता है। भाषा में देरी की असली वजहें — सुनने में कमी, बार-बार कान का संक्रमण, या विकास से जुड़ी कोई स्थिति — जितनी जल्दी पकड़ में आएं, थेरेपी उतनी असरदार होती है।

"अपने आप सीख जाएगा, बच्चों को क्या बोलना सिखाना" — यहां परंपरा असल में सबसे बड़ी मदद रही है: लोरी, ताली वाले खेल, "चंदा मामा", नाम लेकर पुकारना, गोद में बैठाकर बात करना। यह सब बेहतरीन भाषा-प्रशिक्षण है। छोड़ने लायक बस एक नई आदत है — खाना खिलाते समय या रोते बच्चे को चुप कराने के लिए मोबाइल पकड़ा देना।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवाल: मेरा बच्चा 14 महीने का है और अभी नहीं चला, क्या यह चिंता की बात है? — नहीं, अगर वह पकड़कर खड़ा हो रहा है, फर्नीचर के सहारे बगल में चल रहा है और रोज़ कुछ नया कर रहा है। 18 महीने तक चलना शुरू करना सामान्य दायरे में आता है। हां, अगर 14 महीने पर वह खड़ा भी नहीं हो पा रहा या बिना सहारे बैठ नहीं पाता, तो अगली विज़िट का इंतज़ार किए बिना डॉक्टर से मिलें।

सवाल: बच्चा घुटनों के बल चले बिना ही खड़ा होने लगा, क्या कुछ छूट गया? — नहीं। कुछ बच्चे बैठे-बैठे सरकते हैं, कुछ पेट के बल खिसकते हैं, और कुछ घुटनों वाला चरण पूरी तरह छोड़ देते हैं। जब तक वह अपने शरीर पर नियंत्रण बढ़ा रहा है और दोनों हाथ-पैर बराबर इस्तेमाल कर रहा है, रास्ता अलग होने से नतीजा नहीं बदलता।

सवाल: दो भाषाओं वाले घर में क्या एक भाषा छोड़ देनी चाहिए? — नहीं। दोनों भाषाएं चलने दीजिए, बस हर व्यक्ति की भाषा तय रखिए तो बच्चे को साफ ढांचा मिलता है। शब्दों की गिनती करते समय दोनों भाषाओं के शब्द जोड़कर देखें — 24 महीने पर कुल मिलाकर लगभग 50 शब्द होने चाहिए।

सवाल: देर होने पर मदद कहां से मिलेगी? — पहले अपने बाल रोग विशेषज्ञ से, जो ज़रूरत पड़ने पर सुनने की जांच, विकास मूल्यांकन या स्पीच थेरेपी के लिए भेजेंगे। सरकारी स्तर पर आंगनवाड़ी और जिला अस्पताल के अर्ली इंटरवेंशन केंद्रों से भी शुरुआत हो सकती है। यह सामान्य मार्गदर्शन है और डॉक्टर की जांच की जगह नहीं लेता — शक की स्थिति में जल्दी दिखाना ही सबसे अच्छा फैसला है।

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